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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली
All India Institute Of Medical Sciences, New Delhi
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नाभिकीय चुम्‍बकीय अनुनाद विज्ञान विभाग

नाभिकीय चुम्‍बकीय अनुनाद विज्ञान विभाग (एनएमआर) का औपचारिक उद्घाटन नोबल पुरस्‍कार विजेता प्रो. रिचर्ड आर. अंर्स्‍ट, द्वारा मार्च 1993 में किया गया था। विभाग में दो क्लिनिकल 1.5 टेसला होल बॉडी एमआर सिस्‍टम्‍स हैं, जिनका उपयोग रोगियों की देखभाल और अनुसंधान में किया जाता है। विशेषज्ञ और प्रबंधन समिति की एक संयुक्‍त बैठक में मशीन का 60% उपयोग क्लिनिकल कार्य के लिए और विकास संबंधी एमआरआई / एमआरएस अनुसंधान कार्य के लिए 40% उपयोग के लिए दिशानिर्देश तय किए गए हैं। यहां 4.7 टेसला एनिमल एमआर स्‍कैनर छोटे जंतुओं (कृदंतक और चूहे आदि) की इमेजिंग और स्‍पेक्‍ट्रोस्‍कोपी के लिए है जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डीबीटी और डीएसटी), भारत सकरार द्वारा �"राष्‍ट्रीय सुविधा "के रूप में अभिज्ञात किया गया है। डीएसटी से प्राप्‍त निधिकरण से माइक्रो इमेजिंग सहित एक वर्टिकल बोर 9.4 टी एफटी एनएमआर स्‍पेक्‍ट्रोमीटर को 16.4 टी एफटी एनएमआर स्‍पेक्‍ट्रोमीटर में उन्‍नत बनाया जा रहा है।  

 विभाग का सृजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और स्‍वास्‍थ्‍य तथा परिवार कल्‍याण मंत्रालय, भारत सरकार से आरंभिक पूंजी निवेश के माध्‍यम से आठवीं योजना अवधि के आरंभिक भाग में किया गया था। विभाग के सृजन का पहला चरण (चरण-I) इनकी प्राप्ति और स्‍थापना के साथ पूरा हुआ (i) ब्रूकर �बायोस्‍पेक� 47/40 एनिमल रिसर्च एमआरआई / एमआरएस स्‍कैनर (मार्च 1993 से कार्यशील), और (ii) सीमेन्‍सs �मैगनेटॉम� 63/84-एसपी होल बॉडी क्लिनिकल एमआरआई / एमआरएस स्‍कैनर (अक्‍तूबर 1993 से कार्यशील)। दूसरे चरण के तहत वर्टिकल बोर 9.4 टी एफटी एनएमआर स्‍पेक्‍ट्रोफोटोमीटर की स्‍थापना अप्रैल 1996 में बहु विषयक ''आण्विक स्‍तर'' एनएमआर विधि से कोशिकाओं, ऊतकों आदि की जांच के लिए की गई थी। तीसरे चरण में विभाग द्वारा दूसरा एमआर स्‍कैनर (1.5 टी सीमेन्‍स एमआरआई / एमआरएस स्‍कैनर, सोनाटा) स्‍थापित किया गया है और हाल ही में पुराने मैगनेटॉम एमआर स्‍कैनर को 1.5 टी सीमेन्‍स एमआरआई / एमआरएस स्‍कैनर (एवेंटो) में उन्‍नत बनाया गया है। हाल ही में विभाग द्वारा 4.7 टी एनिमल एमआर सिस्‍टम के कंसोल को डीएसटी से प्राप्‍त उन्‍नत अनुदान द्वारा इलेक्‍ट्रॉनिकी और सॉफ्टवेयर की सहायता से उन्‍नत बनाया गया है। एनएमआर विभाग में एक राष्‍ट्रीय अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) है जो एनएमआर / एमआरआई सुविधा के लिए अनुसंधान प्रस्‍तावों की समीक्षा करती है और मार्गदर्शन प्रदान करती है।

 

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